Vishwa Hindi Diwas

January 9, 2019
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January 9, 2019 Team Content Vista

हर साल 10 जनवरी और 14 सितम्बर पास आते ही गूगल पर Vishwa Hindi Diwas और International Hindi Day से जुड़ी बातों का तेज़ी से ज़िक्र होने लगता है । अगर अभी इस वक़्त भी, आप गूगल पर Vishwa Hindi Diwas लिख कर सर्च करें तो गूगल आपको बड़ी आसानी से बता देगा की विश्व हिंदी दिवस पहली बार साल 2006 में मनाया गया था, सो तभी से हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है ।

 

Hindi Diwas

गूगल से आपको यह भी पता चल जाएगा की इसके बीज साल 1975 में ही बो दिए गए थे, जब 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें 30 देशों के करीब 120 से ज़्यादा प्रतिनिधि भाग लेने पहुँचे थे । तभी से हर 10 जनवरी को हिंदी सम्मेलन का आयोजन एक परंपरा बन गया, जिसमें एक बड़ा पड़ाव साल 2006 बना, जब तब के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को “विश्व हिंदी दिवस” के तौर पर मनाए जाने की घोषणा की।

साल का यहीं दिन होता है, जब दुनिया भर के भारतीय दूतावासों और भारत सरकार के सभी ऑफ़िसों में हिंदी से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । इसी कड़ी में नॉर्वे वह पहला देश था, जहाँ के भारतीय दूतावास ने विश्व हिंदी दिवस मनाया था । पहले साल की सफलता के बाद दूसरे और तीसरे साल इसका आयोजन और भी धूम – धाम से, श्री. सुरेशचंद्र शुक्ल की देख- रेख में किया गया था । मगर इसी गूगल पर हिंदी को लेकर और भी बहुत कुछ ऐसा है जो हिंदी को लेकर आपकी राय बदल देगा ।

अगर आज आप हिंदी को लेकर किसी आम आदमी या किसी हिंदी भाषा के जानकार से बात करें, तो वह हिंदी की आज के स्थिति को लेकर यहीं कहता मिलेगा की “ अरे भाई, अब हिंदी में पहले वाली बात कहाँ रही । अब कहाँ कोई हिंदी लिखता या पढ़ता है ?” और बात को खत्म करते – करते यह भी जोड़ देगा “भईया, अब हिंदी का ज़माना लद चुका है” । पर जैसा की अक्सर होता है की ऊपर से दिखाई देने वाली चीज़ हमेशा सच नहीं होती और बिल्कुल यहीं चीज़ हिंदी के बारे में भी सच है । अगर अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर पर इस लेख को पढ़ते हुए अगर आप के मन में भी कुछ ऐसा ही चल रहा है तो कम से एक बार Hindi Content लिखकर गूगल ज़रूर करें, यकीन मानिए आपका भ्रम टूट जाएगा।

हर बीतते दिन के दिन के साथ हिंदी अपनी जड़ें मजबूत करता जा रहा है, जिसका सबसे बड़ा सबूत हाल ही में मिला जब हिंदी के ‘अच्छा’, ‘बच्चा’ और ‘सूर्य नमस्कार’ जैसे शब्दों को ऑक्सफोर्ड डिक्‍शनरी में जोड़ा गया । आज के वक़्त में सोशल मीडिया चलाने वालों को उसमें हिंदी का भी विकल्प मिलने लगा है, जो चीज़ आज से कुछ साल पहले असंभव लगती थी। आज की युवा पीढ़ी भी थोड़ा बहुत ही सही, पर हिंदी में दिलचस्पी ज़रूर दिखा रही है जो इस बात का इशारा है की आने वाला समय हिंदी के लिए अच्छा होगा।

भले ही वह गूगल पर इंग्लिश में International Hindi day या  Hindi Diwas kyu manaya jata hai  ?लिख कर हिंदी के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हों पर, इससे पता चलता है की कम से कम हिंदी के बारे में जानने का उत्साह उनके अंदर तो है ही । अगर आज के समय में सिर्फ गूगल पर हिंदी कंटेंट की मांग 90 % की रफ्तार से बढ़ी है तो इसका पूरा श्रेय इन्हीं को जाता है और गूगल पर बढ़ी हुई हिंदी कंटेंट की मांग ने ही बाज़ार को हिंदी की तरफ खींचा है  ।

यहीं वजह है की अब ऑनलाइन वर्ल्ड में Hindi Content Writing Services का कांसेप्ट अब ज़ोर पकड़ने लगा है क्योंकि बाज़ार भी अब 50 करोड़ से ज़्यादा की हिन्दी बोलने वाली आबादी को एक अच्छे मौके के तौर पर देखने लगा है । हिंदी को अब सिर्फ भारत की एक भाषा से नज़र से नहीं देखा जा रहा, बल्कि हिंदी अब दुनिया कि चौथी सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा के नज़र से देखा जा रहा है ।

सौ बात की एक बात यह की हिन्दी अब बाज़ार की ज़ुबान बन चुकी है और आने वाले वक़्त में हिंदी की पहुँच और ताक़त को बढ़ने की संभावना और भी ज़्यादा है, क्योंकि भारत में अभी भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा है जिसके हाथ में अभी इंटरनेट का पहुँचना बाकी है । यह आबादी का वह हिस्सा है जो हिंदी को ज़्यादा आसानी से पढ़ या समझ लेता है । ऐसे में जैसे – जैसे यह वर्ग इंटरनेट से जुड़ता जाएगा, वैसे – वैसे हिंदी और भी ताक़तवर होकर उभरेगी

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